ऋण पात्रता कैलकुलेटर क्या है?
ऋण पात्रता कैलकुलेटर आपकी मासिक आय, मौजूदा EMIs, और क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर बैंक से मिलने वाली अधिकतम ऋण राशि का अनुमान लगाता है। सामान्य नियम: कुल EMI (मौजूदा + नई) मासिक आय का 40-60% से अधिक नहीं हो सकता (FOIR/DBR सीमा)। होम लोन के लिए 60% सीमा, पर्सनल लोन के लिए 40-50%।
ऋण पात्रता कैलकुलेटर
आपकी आय और मौजूदा EMIs के आधार पर अधिकतम ऋण राशि।
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Max Loan You Can Get
₹0
विश्लेषण
इस टूल के बारे में
The Loan Eligibility Calculator estimates the maximum loan you qualify for based on your monthly income, existing EMIs, and the bank's FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio - typically 40-55%).
यह कैसे काम करता है
- Enter monthly net income.
- Enter existing EMIs (other loans, credit cards).
- Enter FOIR % (most banks: 50%).
- Enter target tenure and interest rate.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
What is FOIR?
Fixed Obligation to Income Ratio - the % of your monthly income that banks allow to go toward total EMIs (existing + new). Typical: 40-55% depending on income bracket.
How can I increase my eligibility?
Add a co-applicant (spouse/parent), prepay existing loans, increase tenure, improve CIBIL score (740+), declare other income (rental, freelance).
टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है
"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:
| शब्द | मतलब | क्यों जरूरी है |
|---|---|---|
| CTC (कॉस्ट टू कंपनी) | कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनस | ऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता |
| ग्रॉस सैलरी | CTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा | TDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है |
| नेट सैलरी / इन-हैंड | ग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्स | यही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है |
कटौतियों का क्रम
- EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
- प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
- TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
- सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
- HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।
उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी
| मद | वार्षिक | मासिक |
|---|---|---|
| CTC | ₹12,00,000 | ₹1,00,000 |
| EPF (कर्मचारी 12%) | ₹21,600 | ₹1,800 |
| TDS (नई रिजीम) | ₹83,200 | ₹6,933 |
| प्रोफेशनल टैक्स | ₹2,400 | ₹200 |
| इन-हैंड सैलरी | ₹8,92,800 | ₹74,400 |
टैक्स बचाने के तरीके
- सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
- सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
- HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
- NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
- होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?
अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।
CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?
CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।
सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?
यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।
