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PF निकासी नियम क्या है?

PF निकासी नियम पृष्ठ बताता है कि आप अपने EPF से कब, कितना, और किस कारण से निकाल सकते हैं। मुख्य कारण: रिटायरमेंट (55+), 2+ महीने नौकरी न होने पर 100% निकासी, मकान खरीद/निर्माण (मूल+डीए का 36×), शादी (कर्मचारी हिस्से का 50%, 7 साल सेवा), शिक्षा (बच्चे की उच्च शिक्षा, 50%), चिकित्सा (कर्मचारी या परिवार)। कुछ निकासी कर-मुक्त, कुछ TDS के साथ।

PF निकासी नियम

अपने EPF से कब और कितना निकाला जा सकता है - सभी कारण और शर्तें।

Full Withdrawal

ScenarioRule
At retirement (≥58)Full + interest
Unemployed for >2 monthsFull balance
Permanent disabilityFull balance
Migration abroad permanentlyFull balance

Partial Withdrawal (Advances)

PurposeService RequiredMax
Marriage (self/sibling/child)7 years50% of own contribution
Higher education (self/child)7 years50% of own contribution
Buy/construct house5 years36 months wages or balance
Home loan repayment3 years90% of total
Renovation5 years (10 from new house)12 months wages
Medical (self/family)None6 months wages or own contrib
Pre-retirement (after 54)-90% of balance
Unemployment (1 month)-75% of balance

Tax on Withdrawal

If withdrawn after 5 years of continuous serviceFully tax-free
If withdrawn before 5 yearsTaxable + TDS @10% (PAN provided)
Without PAN, before 5 yearsTDS @ max marginal rate (30%)
Withdrawal < ₹50,000No TDS

Continuous service includes time at previous employer if PF was transferred (not withdrawn).

इस टूल के बारे में

Complete reference for EPF withdrawal rules. EPF can be fully withdrawn at retirement, unemployment, or migration. Partial advances allowed for marriage, education, medical, home purchase, and other notified purposes.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

When can I fully withdraw EPF?

At retirement (≥58), if unemployed >2 months, on permanent disability, or on migration abroad permanently.

Is EPF withdrawal taxable?

Tax-free if withdrawn after 5 years of continuous service. Taxable + 10% TDS (if PAN provided) before 5 years. Service at multiple employers counts if PF was transferred (not withdrawn).

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टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

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भारत टूल संपादकीय
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