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🇮🇳 धारा 87A छूट कैलकुलेटर (भारत) क्या है?

धारा 87A आयकर अधिनियम की एक धारा है जो निम्न-आय करदाताओं को कर छूट देती है। नई व्यवस्था में: ₹12 लाख कर-योग्य आय तक पूरी कर देयता पर ₹60,000 तक की छूट (प्रभावी रूप से शून्य कर)। पुरानी व्यवस्था में: ₹5 लाख तक की आय पर ₹12,500 तक की छूट। ₹12 लाख से थोड़ी अधिक आय पर सीमांत राहत भी मिलती है।

🇮🇳 धारा 87A छूट कैलकुलेटर (भारत)

अपनी कर देयता को शून्य करने वाली धारा 87A छूट की गणना करें।

इनपुट

इस टूल के बारे में

Section 87A[1] provides a tax rebate making your final tax zero if your taxable income is below a threshold. New regime FY 2025-26: ₹12 lakh (₹12.75 lakh for salaried with ₹75,000 standard deduction). Old regime: ₹5 lakh. The rebate is capped at the tax computed - it doesn't flow as a refund.

यह कैसे काम करता है

  1. Step 1

    Confirm you're a resident individual (HUFs and non-residents not eligible).

  2. Step 2

    Calculate total taxable income after deductions.

  3. Step 3

    If taxable income ≤ ₹12 lakh (new) or ₹5 lakh (old): tax payable = ₹0.

  4. Step 4

    4% cess applies on tax above zero - so ₹0 tax = ₹0 cess.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Salaried earning ₹12.75 lakh - really zero tax?

Yes - ₹75K standard deduction reduces taxable to ₹12 lakh, then 87A wipes out the tax. Verified by CBDT FAQ.

What if I exceed by ₹1?

Marginal relief applies in new regime - your tax can't exceed the income above the threshold. So at ₹12,01,000 you don't pay full tax on the ₹1.

Does 87A apply to senior citizens?

Yes - all resident individuals regardless of age. Old-regime exemption is higher for seniors (₹3L/₹5L), so 87A often makes no difference.

Capital gains and 87A?

STCG on equity (15%/20%) and LTCG on equity (12.5%) ARE eligible for 87A rebate in computing total tax. Specific provisions apply.

टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।