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क्रिप्टो कर कैलकुलेटर क्या है?

क्रिप्टो कर कैलकुलेटर वर्चुअल डिजिटल असेट (VDA) - क्रिप्टो, NFT, टोकन - से लाभ पर देय कर की गणना करता है। FY 2022-23 से: सभी VDA लाभ पर फ्लैट 30% कर + 4% सेस + अधिभार। 1 जुलाई 2022 से प्रत्येक VDA लेनदेन पर 1% TDS (₹10,000/₹50,000 की सीमा से ऊपर)। कोई कटौती नहीं, हानियाँ अन्य आय से समायोजित नहीं हो सकतीं।

क्रिप्टो कर कैलकुलेटर

क्रिप्टो/VDA लाभ पर देय 30% कर और 1% TDS का अनुमान।

इनपुट

No deductions allowed except cost of acquisition. Losses cannot be set off against any other income or carried forward.

Tax + TDS

₹0

विश्लेषण

इस टूल के बारे में

The Crypto Tax Calculator computes tax on Virtual Digital Assets (VDA) per Section 115BBH. Cryptocurrency gains in India are taxed at a flat 30% + 4% cess with no deductions allowed except cost of acquisition.

Additionally, 1% TDS applies on every transfer (Section 194S). Losses cannot be set off against any other income or carried forward.

यह कैसे काम करता है

  1. Enter buy cost and sell value.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Can I offset crypto losses?

No. Loss in one crypto cannot be set off against gain in another crypto or any other income. Cannot be carried forward to future years either.

Is the 1% टीडीएस adjustable?

Yes, the 1% TDS can be claimed as credit when filing ITR. If your final tax is less, you get a refund.

What counts as VDA?

All cryptocurrencies, NFTs, tokens. Excludes Indian rupee, gift cards, frequent flyer miles, etc. Specific exemptions notified by CBDT.

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टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

IT
भारत टूल संपादकीय
भारत टूल टीम द्वारा अनुरक्षित कैलकुलेटर और व्याख्यान। FY 2025-26 के लिए अद्यतन।