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HRA शहर वर्गीकरण क्या है?

एचआरए छूट के लिए केवल चार शहर मेट्रो माने जाते हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई - यहाँ रहने पर HRA छूट सीमा मूल वेतन का 50% है। अन्य सभी शहर (बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, गुरुग्राम सहित) गैर-मेट्रो हैं - सीमा 40%। यह वर्गीकरण आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत है।

HRA शहर वर्गीकरण

आपका शहर एचआरए के लिए मेट्रो है या गैर-मेट्रो - 50% बनाम 40% सीमा।

Metro Cities (50% of Basic + DA)

CityState
MumbaiMaharashtra
DelhiDelhi NCT
KolkataWest Bengal
ChennaiTamil Nadu

Non-Metro (40% of Basic + DA)

All other cities, including:

Bengaluru, Hyderabad, Pune, Ahmedabad - despite being major IT/business hubs, treated as non-metro for HRA
Gurgaon, Noida, Faridabad - even though within NCR, treated separately from Delhi
Tier-2 cities: Chandigarh, Indore, Jaipur, Lucknow, Surat, Vadodara, Coimbatore, Kochi, Bhubaneswar, etc.
All small towns and rural areas

एचआरए छूट सूत्र

Exemption = minimum of three:

  1. Actual HRA received
  2. 50% of (Basic + DA) for metro / 40% for non-metro
  3. Rent paid - 10% of (Basic + DA)
→ Try the HRA Exemption Calculator

इस टूल के बारे में

For HRA tax exemption under Section 10(13A)[1], only four cities qualify as Metro: Mumbai, Delhi, Kolkata, Chennai (50% of basic). All other cities including Bengaluru, Hyderabad, Pune, Gurgaon use the non-metro 40% rate.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Why is Bengaluru not metro for HRA?

The Income Tax Act's metro definition predates Bengaluru's growth as a tech hub. Despite having metro infrastructure (Namma Metro), it remains non-metro for HRA. Same for Hyderabad, Pune, Ahmedabad.

Does it matter for high rents in non-metros?

Yes - non-metros use 40% of basic, not 50%. So even if you pay metro-level rent in Bengaluru, your exemption is capped lower.

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टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

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भारत टूल संपादकीय
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