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एकमुश्त कैलकुलेटर क्या है?

एकमुश्त (लम्पसम) कैलकुलेटर एक बार के निवेश के भविष्य मूल्य की गणना करता है - चक्रवृद्धि सूत्र FV = P × (1+r)^n का उपयोग करके। यह म्यूचुअल फंड, FD, बॉन्ड, या किसी भी एकमुश्त निवेश के लिए लागू होता है। एसआईपी से अलग - यहाँ पूरी राशि पहले दिन निवेश होती है, इसलिए संपूर्ण अवधि के लिए चक्रवृद्धि होती है।

एकमुश्त कैलकुलेटर

एक बार के निवेश पर भविष्य मूल्य और चक्रवृद्धि रिटर्न का अनुमान।

इनपुट

% p.a.
years
Withdrawal phase (optional)
Add SWP after growthStart a Systematic Withdrawal Plan once the lumpsum has grown

Future Value

₹0

Summary

Invested
₹0
Returns
₹0
Multiplier

वर्ष-wise growth

इस टूल के बारे में

A Lumpsum Calculator shows how a one-time investment grows over time at a given compound annual return. Use it for evaluating mutual fund lumpsum investments, fixed deposits, or any single-shot investment.

यह कैसे काम करता है

  1. Enter the investment amount.
  2. Enter expected annual return (12% for equity, 7% for debt).
  3. Enter holding period in years.

सूत्र

FV = P × (1 + r)^n
where P = principal, r = annual rate, n = years

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकमुश्त vs SIP - which gives better returns?

If markets are at fair value, lumpsum wins on average (full money invested longer). If markets are high, SIP smooths the cost. For most retail investors who don't time markets, SIP is the safer choice.

What's a good return rate to assume?

Equity diversified: 11-13%. Debt: 6-8%. Balanced: 9-10%. Real estate: 6-9%. Gold: 8-10% over long periods.

How does compounding work?

Year 1: ₹1L grows to ₹1.12L (at 12%). Year 2: that ₹1.12L grows to ₹1.25L. Each year's gains earn returns the next year - the snowball effect.

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टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

IT
भारत टूल संपादकीय
भारत टूल टीम द्वारा अनुरक्षित कैलकुलेटर और व्याख्यान। FY 2025-26 के लिए अद्यतन।