Skip to content
3tej home
← व्यक्तिगत वित्त

एफडी और आरडी कैलकुलेटर क्या है?

एफडी और आरडी कैलकुलेटर बैंक सावधि जमा और आवर्ती जमा पर परिपक्वता राशि की गणना करता है। एफडी एक एकमुश्त निवेश है; आरडी हर महीने एक निश्चित राशि जमा करना है। दोनों आम तौर पर तिमाही चक्रवृद्धि करते हैं। परिणाम में परिपक्वता राशि, अर्जित ब्याज और कुल जमा शामिल है।

एफडी और आरडी कैलकुलेटर

एकमुश्त एफडी और मासिक आरडी दोनों के लिए परिपक्वता राशि और ब्याज की गणना करें।

इनपुट

% p.a.
years
Tax (TDS) impact
Apply TDS & taxFD/RD interest is fully taxable at slab rate
Premature withdrawal (optional)
Withdraw before maturityBanks reduce rate by 0.5-1% as penalty

Maturity Amount

₹0

Summary

Invested
₹0
Interest Earned
₹0
TDS @ 10% applies if interest exceeds ₹40,000/year (₹50,000 for seniors). Interest is taxable as per your slab.

इस टूल के बारे में

The FD & RD Calculator computes maturity values for Fixed Deposits (one-time investment, fixed tenure) and Recurring Deposits (monthly contributions). Both compound interest periodically (usually quarterly) and are offered by banks and post offices.

FDs typically yield 6.5-7.5% in 2025 for general public, 7-8% for senior citizens. RDs are similar but with the discipline of monthly contributions.

यह कैसे काम करता है

  1. Pick FD or RD mode.
  2. For FD: enter the lump sum amount. For RD: enter monthly deposit.
  3. Enter the bank's interest rate and tenure.
  4. Pick compounding frequency - banks usually compound quarterly.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एफडी पर ब्याज कर-योग्य है?

हाँ - एफडी ब्याज पूरी तरह कर-योग्य है ('अन्य स्रोतों से आय' के तहत आपके स्लैब दर पर)। बैंक एक वित्त वर्ष में ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक ब्याज पर 10% TDS काटते हैं। पैन न देने पर 20% TDS कटता है।

Which is better - FD or RD?

FD if you have a lump sum to invest. RD if you want to save monthly out of salary. Returns are similar; RD adds the discipline of forced saving.

Can I withdraw FD prematurely?

Yes, with a penalty (typically 0.5-1% reduction in interest rate). Some 'no-penalty' FDs exist but at lower base rates.

What is the safest place to keep FDs?

All commercial bank deposits up to ₹5 Lakh per bank are insured by DICGC (RBI subsidiary). To diversify, split large amounts across multiple banks.

विज्ञापन

टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

IT
भारत टूल संपादकीय
भारत टूल टीम द्वारा अनुरक्षित कैलकुलेटर और व्याख्यान। FY 2025-26 के लिए अद्यतन।