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SWP कैलकुलेटर क्या है?

SWP (Systematic Withdrawal Plan) कैलकुलेटर निवेश कोष से नियमित मासिक निकासी की गणना करता है। शेष कोष पर रिटर्न मिलता रहता है। यह बताता है कि कितने वर्षों तक कोष चलेगा, कितनी राशि बचेगी, और कुल कितना निकाला। रिटायरमेंट आय की योजना के लिए सबसे अच्छा साधन - एसआईपी का विपरीत।

SWP कैलकुलेटर

अपने निवेश कोष से मासिक नियमित आय निकासी की योजना।

इनपुट

% p.a.
years

Final Balance

₹0

Summary

Total Withdrawn
₹0
Interest Earned
₹0
Lasts
-

साल-दर-साल

इस टूल के बारे में

A Systematic Withdrawal Plan (SWP) lets you redeem a fixed monthly amount from a mutual fund corpus while the rest stays invested. SWPs are popular for retirement income because they're tax-efficient (only the gain portion is taxed, not the principal).

यह कैसे काम करता है

  1. Enter your total corpus.
  2. Enter desired monthly withdrawal.
  3. Enter expected annual return.
  4. Enter period in years.

The calculator shows whether your corpus survives the period or runs out, and the year-by-year balance.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is the safe withdrawal rate?

Conservative: 3-3.5% per year of corpus. Standard: 4% (Trinity Study). For India's higher long-term returns, 4-5% is often considered safe.

SWP पर कर कैसे लगता है?

इक्विटी फंड SWP: 1 साल से कम होल्डिंग पर 20% STCG, अधिक पर 12.5% LTCG (₹1.25 लाख छूट के बाद)। प्रत्येक निकासी पर आनुपातिक रूप से पूँजीगत लाभ की गणना (FIFO आधार)। डेट फंड (अप्रैल 2023+): सभी लाभ स्लैब दर पर।

SWP vs FD interest for retirement?

SWP from balanced/equity funds typically gives higher post-tax returns than FD interest, but with market risk. FD: predictable but TDS + slab tax. SWP: variable but lower effective tax.

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टेक-होम सैलरी वास्तव में कैसे कैलकुलेट होती है

"सैलरी" का मतलब चार अलग-अलग नंबर हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि आप कौन सा नंबर देख रहे हैं:

शब्दमतलबक्यों जरूरी है
CTC (कॉस्ट टू कंपनी)कंपनी आप पर कुल कितना खर्च करती है: सैलरी + PF + ग्रेच्युटी + बीमा + बोनसऑफर लेटर में यह नंबर होता है, लेकिन यह कभी आपके अकाउंट में नहीं आता
ग्रॉस सैलरीCTC माइनस एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमाTDS और इनकम टैक्स इसी पर लगता है
नेट सैलरी / इन-हैंडग्रॉस माइनस TDS, PF (एम्प्लॉयी शेयर), प्रोफेशनल टैक्सयही रकम आपके बैंक अकाउंट में आती है

कटौतियों का क्रम

  1. EPF (एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड): बेसिक सैलरी का 12% कर्मचारी + 12% नियोक्ता। टैक्सेबल इनकम कम करता है।
  2. प्रोफेशनल टैक्स: राज्य सरकार द्वारा, ज्यादातर ₹200/महीना (अधिकतम ₹2,500/वर्ष)।
  3. TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स): नियोक्ता हर महीने आपकी सैलरी से इनकम टैक्स काटता है।
  4. सेक्शन 80C छूट: PPF, ELSS, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट (पुरानी रिजीम)।
  5. HRA छूट: किराए पर रहने वालों को HRA पर टैक्स छूट मिलती है (शहर और किराए के अनुसार)।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC पर नेट सैलरी

मदवार्षिकमासिक
CTC₹12,00,000₹1,00,000
EPF (कर्मचारी 12%)₹21,600₹1,800
TDS (नई रिजीम)₹83,200₹6,933
प्रोफेशनल टैक्स₹2,400₹200
इन-हैंड सैलरी₹8,92,800₹74,400

टैक्स बचाने के तरीके

  • सेक्शन 80C: PPF, ELSS, सुकन्या समृद्धि, LIC, ट्यूशन फीस पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
  • सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) की छूट।
  • HRA छूट: मेट्रो शहरों में बेसिक का 50%, नॉन-मेट्रो में 40%।
  • NPS (सेक्शन 80CCD): 80C की ₹1.5 लाख के अलावा अतिरिक्त ₹50,000 की छूट।
  • होम लोन (सेक्शन 24): ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरानी रिजीम या नई रिजीम, कौन सी बेहतर है?

अगर आपके पास HRA, 80C, 80D जैसी छूट नहीं है, तो नई रिजीम बेहतर है। अगर ₹4-5 लाख से ज्यादा की छूट क्लेम कर सकते हैं, तो पुरानी रिजीम फायदेमंद है।

CTC और इन-हैंड में इतना फर्क क्यों है?

CTC में एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी, बीमा, बोनस शामिल होता है जो आपको सीधे नहीं मिलता। असल में इन-हैंड CTC का 65-75% ही होता है।

सैलरी बढ़ने पर टैक्स कितना बढ़ेगा?

यह आपके मार्जिनल टैक्स रेट पर निर्भर करता है। ₹10,00,000 से ₹12,00,000 की बढ़ोतरी पर नई रिजीम में 15% टैक्स लगेगा, यानी ₹30,000 अतिरिक्त टैक्स।

IT
भारत टूल संपादकीय
भारत टूल टीम द्वारा अनुरक्षित कैलकुलेटर और व्याख्यान। FY 2025-26 के लिए अद्यतन।